हिन्दू नववर्ष यानि नए संवत की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होती है। संवत 2083 में प्रतिपदा तिथि का क्षय है।सवंत 2083,19 मार्च 2026 को शुरु होगी और 06 अप्रैल 2027 को समाप्त होगी।
भारतीय ज्योतिष के अनुसार कुल 60 संवत होते हैं। प्रत्येक सम्वत का एक नाम होता है। नाम के अनुसार ही उस संवत्सर का फल निश्चित किया जाता है।संवत 2083 को रौद्र नाम दिया गया है। साठ सम्वतसरों को सुविधा की दृष्टि से बारह खंडो में विभाजित किया जाता है।प्रत्येक खंड को युग कहा जाता है। प्रत्येक युग में पांच संवत्सर होते है। युग के फल न्यूनाधिक मात्रा में युग के पांचों संवतसरों पर लागू होता है। रौद्र नाम का सम्वत 2083 एकादश युग में आता है। महाऋषि पारशरादि के मतानुसार एकादश युग में पिंगल , कालयुक्त ,सिद्धार्थ ,रौद्र व दुर्मति नाम के पांच संवत आते हैं। इस युग का फल रोग ,शोक ,जनहानि ,अकाल व टकराव आदि है। रौद्र नाम के संवत्सर में वर्षा कम होती है। उपज की कमी रहती है। सरकारें जनविरोधी कार्य करती हैं। जंगलों /खलिहानों में आग लगने से हानि होती हैं।
उपर दिए गए विवरण से स्पष्ट है की इस वर्ष बीमारियां बढ़ेंगी ,दुर्घटनाओं में बहुत लोगों की मृत्यु होगी ,आगजनी की घटनाओं में वृद्धि होगी , भिन्न भिन्न जातियों और समूहों में टकराव होगा ,उपज कम होगी और कई सरकारें जनविरोधी नीतियां लागु करेंगी। ऐसा लगता है की आम आदमी को कष्टों से छुटकारा मिलने की कोई संभावना इस वर्ष भी नहीं है। विश्व के कई देशों में जो टकराव की स्थिति बनी हुई है वह बनी रहेगी। कुछ नए टकराव भी पैदा होंगे। आंतकवादी गतिविधियां बढ़ेगी।सांप्रदायिक वैमनस्य बढ़ेगा। संवत के शुरु होते समय बृहस्पति की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है इसलिए बुरे प्रभाव अधिक होंगे। बृहस्पति संवत का राजा भी है। एकादश युग के स्वामी अश्वनीकुमार होते हैं। वैज्ञानिक किसी गंभीर बिमारी का इलाज ढूंढने में कामयाब हो सकते हैं। मेडिकल सिस्टम में कुछ सुधार भी संभव हैं।
वर्ष का प्रधानमंत्री मंगल है। यह इस बात की पुष्टि करता है की सरकारें जनविरोधी नीतियां लागु करेंगी। व्यापारिक गतिविधियों के लिए वातावरण प्रतिकूल रहेगा और लोगों को शस्त्र व आग से हानि होगी। किसी का कोई बड़े भर्ष्टाचार का मामला प्रकाश में आ सकता है। लोगों में अशांति बढ़ेगी। वर्ष के अन्य अधिकारी इस प्रकार से हैं। मेघेश चंद्रमा ,सस्येश गुरु ,दुर्गेश चंद्रमा ,धनेश गुरु ,रसेश शनि ,धान्येश बुध ,नीरसेश गुरु व फलेश चन्द्रमा है। इन सबका फल अलग अलग होता है,पर राजा और प्रधानमंत्री के फल ही मुख्यरूप से दृष्टिगोचर होते हैं।
वर्ष में वर्षा की संभावना पर विचार करने के लिए मुख्य रूप से आर्द्रा प्रवेश कुंडली का विचार किया जाता है। इस वर्ष सूर्ये आर्द्रा नक्षत्र में 22 जून को 12 बज कर 26 मिनट पर प्रवेश करेगा। उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी तिथि और सोमवार होगा। उस समय की कुंडली नीचे दी जा रही है।इस कुंडली में पृथ्वी तत्व राशि लग्न में उदय हो रही है और उसमें चंद्र ग्रह है जो पूर्व दिशा में अच्छी वर्षा का संकेत है।
जल तत्व कर्क राशि में गुरु -शुक्र की युति है। यह दक्षिण -पूर्व दिशा में और उनका मकर राशि को देखना उत्तर-पश्चिम दिशा में अच्छी वर्षा का सकेंत देते है।इसका मतलब यह है कि बिहार ,झारखण्ड ,छत्तीसगढ़ ,पश्चिम बंगाल ,आंध्रप्रदेश ,तमिलनाडु ,तेलंगाना , हरियाणा ,पंजाब ,हिमाचल ,उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश में अच्छी वर्षा होगी। सातवें भाव में शनि व नवें भाव में मंगल है। सातवें या नवें भाव में शनि या मंगल होने पर विनाशकारी वर्षा हो सकती है। पश्चिम व दक्षिण पश्चिम दिशा में कुछ स्थानों पर बाढ़ ,जल-प्लावन , भू क्षरण की आशंका है जैसे गुजरात ,राजस्थान ,महाराष्ट्र ,केरल व कर्नाटक इत्यादि। गुजरात ,राजस्थान ,महाराष्ट्र ,गोवा ,दमन ,दिउ के कुछ हिस्सों में तथा उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से कम वर्षा होगी। रौद्र संवत्सर के सामान्य फलों को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है की अनियमित वर्षा के कारण कहीं जल की कमी और कहीं जल -प्लावन की स्थिति रहेगी। इस के कारण उपज कहीं कम होगी और कहीं फसलों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण हानि होगी। खाद्पदार्थों ,फलों और सब्जिओं के दामों में बढ़ोतरी होगी।
इस वर्ष शनि मीन राशि में होने से उत्तर दिशा में अशांति रहेगी । शनि की दृष्टि वृष , कन्या और धनु राशि पर रहेगी। विश्व के उत्तरी भागो में और भारत के हिमालयवर्ती क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं ,उपद्रवों ,हिंसात्मक घटनाओं ,आतंकवादी घटनाओं और भारत की सीमा पर सैनिक संघर्ष की घटनाओं के प्रति भारत सरकार को सावधान रहने की आवश्यकता है।पूर्वी व दक्षिण दिशा के प्रांतों में हिंसात्मक घटनायें होने की संभावना है।
संवत्सर 2083 का वाहन नौका है।गम्भीर वाहन दुर्घटनाओं के प्रति सावधानी की आवश्यकता है। पशुओं में कोई रोग फैल सकता है। इस सवंतसर में सामाजिक तत्व उपद्रव बनाए रख सकते हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
वर्ष स्तम्भ का विचार करने पर वायु स्तम्भ ही सबसे बलि पाया गया है। अतः आयात -निर्यात के कारण खाद्यपदार्थों की उपलब्धता बनी रहेगी। मानसून की बिगड़ी चाल से जनता को कष्ट होगा।वैशाख ज्येष्ठ के महीनों में स्वाभाविक रूप से होने वाली लू और तेज़ हवाएं देखने को मिलेंगी।
संवत्सर में पड़ने वाली चार खास तिथियों का विचार वार्षिक फलादेश के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। ये खास तिथियां हैं -वैशाख शुक्ला तृतीया व रोहिणी नक्षत्र ,गत संवत की पोष अमावस्या व मूल नक्षत्र ,श्रावण पूर्णिमा व श्रावण नक्षत्र तथा कार्तिका पूर्णिमा व कृत्तिका नक्षत्र। इस वर्ष वैशाख शुक्ला तृतीया को रोहिणी नक्षत्र का योग 13 %है। गत संवत की पोष अमावस्या व मूल नक्षत्र का योग 31.09 %है। श्रावण पूर्णिमा व श्रावण नक्षत्र के योग का अभाव है। कार्तिक पूर्णिमा को कृतिका नक्षत्र का योग 89% है। देश में प्राकृतिक आपदाओं व प्रतिकूल जलवायु के कारण पैदावार कम होगी। आतंरिक व बाहरी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता होगी। केन्द्र सरकार और कुछ राज्य सरकारों में टकराव बढ़ेगा। धार्मिक उन्माद बढ़ेगा। विकास की गति व आर्थिक समृद्धि बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने पड़ेंगे।सीमा क्षेत्रों में आधारभूत ढांचा व सामरिक सुविधाएं बढ़ेंगी। हवाई अड्डों का निर्माण होगा। आंतरिक व बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सफलता मिलेगी।
संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च 2026 को 06 :53 :17 बजे होगी। देहली में उस समय मीन लग्न उदित होगा।उस समय की कुंडली ऊपर बनाई गई है। मेष संक्रान्ति 14 अप्रैल 2026 को 09 :32 बजे होगी। उस समय देहली में वृष लग्न उदित होगा। उस समय की कुंडली नीचे दी गई है। ज्योतिष में इसे जगत लग्न कहा जाता है। जगत लग्न में लग्नेश द्वादश भाव में है। शनि की दृष्टि लग्न पर ,पंचम भाव पर व अष्टम भाव पर है। शनि नवमेश -दशमेश
होने से योगकारक है। गुरु की दृष्टि छटे ,आठवें और दसवें भाव पर है। मंगल की दृष्टि दूसरे भाव पर ,पांचवें भाव पर व छटे भाव पर है। चंद्रमा तृतीयेश होकर दसवें भाव में राहु -केतु अक्ष में है। बुध नीच राशि में है। छटे भाव पर गुरु ,मंगल ,शुक्र व राहु की दृष्टि है। भारत के सम्बन्ध कुछ देशों के साथ तनावपूर्ण हो सकते हैं। अष्टम भाव पर शनि ,केतु व गुरु की दृष्टि है। प्राकृतिक आपदाओं ,हिंसक गतिविधियों व लड़ाई-झगड़ों के कारण जन -धन की हानि होगी। आर्थिक मामलों में व व्यापारिक गतिविधियों में असमंजस की स्थिति बनी रहेगी। देश के अंदर और बाहर सीमाओं पर अशांति /तनाव का वातावरण रहेगा। बहुत प्रयास के बाद भी सरकार स्थिति को संभालती ही नजर आएगी। सरकार पर संकट बना रहेगा। न्यायपालिका और सरकार में विरोधाभास पैदा हो सकता है।अप्रैल 2026 में मंगल -शनि की युति से और नवंबर 2026 से मार्च 2027 तक शनि पर मंगल की दृष्टि के कारण युद्ध ,प्राकृतिक आपदाओं ,दुर्घटनाओं व सांप्रदायिक उन्माद का भय बना रहेगा।भारत की उत्तरी सीमा पर युद्ध का वातावरण बना रहेगा। पड़ोसी देशो में भी अशांति रहेगी।फरवरी -मार्च 2027 में विश्व के व्यापारिक वातावरण में हलचल रहेगी।
संवत प्रवेश कुंडली में मीन लग्न में शनि ,चंद्र,सूर्य और शुक्र हैं। मंगल ,बुध और राहु द्वादश भाव में हैं। गुरु चतुर्थ भाव में और केतु छटे भाव में है।लग्नेश गुरु चतुर्थ भाव में अपनी शत्रु राशि में है। अष्टम ,दशम व द्वादश भाव पर उसकी दृष्टि है। शनि लग्न में बैठकर तीसरे ,सातवें व दसवें भाव पर दृष्टि डाल रहा है। शुक्र अपनी उच्च राशि में बैठकर सातवें भाव को देख रहा है। पडोसी देशों से हमारे सम्बन्ध तनावपूर्ण बने रहेंगे। तीसरे भाव पर शनि-मंगल की दृष्टि के कारण यातायात और दूरसंचार के क्षेत्रों में कोई व्यावहारिक या कूटनैतिक व्यवधान आ सकता है। इन क्षेत्रों से संबंधित कोई आंतरिक परिवर्तन /संशोधन या समस्या भी हो सकती है। मई -जून में किसी पड़ोसी देश के षड़यंत्र के कारण जनहानि सम्भव है। वर्षाऋतु में मौसम का प्रबल रूप दिखाई देना संभव है। कुछ प्रदेशों में हानि की संभावना भी दिखाई देती है। सातवें भाव पर शनि-मंगल की दृष्टि के कारण अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में गतिरोध हो सकता है। असामाजिक तत्वों व चोर उचक्कों की गतिविधिओं को रोकने के लिए पुलिस को इन पर कड़ी निगरानी रखनी पड़ेगी। जासूसी तंत्र को भी मजबूत करना पड़ेगा। शत्रु देशों के जासूस सक्रिय हो सकते हैं। शिशु मृत्यु दर में बढ़ोतरी होगी। चौथे भाव में गुरु शत्रु राशि में है। देश में कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को खराब करने के लिए विदेशी ताकतें षड़यंत्र करती रहेंगी और सुरक्षा एजेंसियों को इन ताकतों के प्रति सचेत रहना होगा। खानों में दुर्घटनाएं हो सकती हैं।किसी आकस्मिक आपदा के फलस्वरूप राष्ट्रीय खजाने पर दबाव पड़ेगा। मार्च से जून तक सरकार में उच्च स्तर पर कई कारणों से चिन्ता रहेगी ,पर सरकार की स्थिरता पर कोई आंच नहीं आएगी। छटे भाव में केतु के कारण शत्रु देश कूटनीति से हमारे खिलाफ षड़यंत्र करेंगे। जल सेना को विशेष रूप से सावधान रहना होगा। कपड़े व भारी मशीनरी से सम्बन्धित किसी उद्योग में कोई दुर्घटना घट सकती है। शत्रु देश किसी जासूसी कांड के फलस्वरुप हमारे देश को हिंसात्मक हानि पहुंचा सकते हैं। वायुयान और सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों के मरने की संभावना है। षष्टेश और अष्टमेश लग्न में होने के कारण लोगों को कई स्वास्थय सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। लोगों में असंतोष और बेचैनी बढ़ेगी।
माननीय प्रधानमंत्री जी को सेहत के प्रति बहुत सावधान रहना होगा। राहुल गांधी जी का समय कष्टदायक रहेगा। न्यायिक प्रक्रिया ,निकट सहयोगियों से मनमुटाव व श्रीमति सोनिया गांधी के स्वास्थय के कारण चिंता रहेगी।
तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह के आसार हैं। पश्चिम बंगाल में हिंसक गतिविधियां तनाव का कारण बनेंगी। दीदी कोई चौंकाने वाला राजनैतिक निर्णय ले सकती हैं। उन्हें अपने स्वास्थय और सुरक्षा के प्रति सावधान रहना चाहिए।
श्री अमित शाह जी को संवत के शुरु में कुछ चिंताए हो सकती है। इनके राजनैतिक जीवन में कुछ नया प्रकट हो सकता है। नवंबर दिसंबर में कोई स्वास्थय सम्बन्धी समास्या हो सकती है।
माननीयों के बारे में उनकी प्रचलित कुंडलियों को देखकर लिखा गया है।
अमेरिका विश्व में अपने आप को विश्वशक्ति दिखाने के लिए हर प्रकार की उचित -अनुचित निति का पालन करता रहेगा। चीन और अमेरिका अघोषित युद्धकाल में प्रवेश करते दिखेंगे। पाकिस्तान भारत के प्रति शत्रु जैसा व्यवहार करता रहेगा। अमेरिकी दवाब से परेशान होकर वह एक बार फिर चीन की गोद में बैठने का प्रयास करेगा। बलूचिस्तान में आजादी का संघर्ष और बल पकड़ेगा। अफगानिस्तान से युद्ध जैसा वातावरण बना रहेगा। आर्थिक स्थिति दयनीय बनी रहेगी। चीन की जनता प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक समस्याओं से परेशान रहेगी। अंतर्राष्ट्रीय संबंध खराब रहेंगे। उत्तर पूर्वी सीमा पर भारत के लिए चीन परेशानी पैदा कर सकता है। आंतरिक कलह से भी चीन त्रस्त रहेगा।रुस से भी चीन के संबंध खराब हो जांएगे। कुछ कठिन परिस्थितियों के बावजूद रूस विश्वशक्ति बना रहेगा। ईजराईल अपने सभी शत्रुओं पर अंततः वर्चस्व स्थापित कर लेगा। ईरान के शीर्ष नेताओं के लिए समय अशुभ है। यहां तक कि IRGC को भी विरोधी दलों का सामना करना पड़ेगा। ब्रिटेन के लिए भी यह संवत अशुभ रहेगा। मूल निवासियों और आप्रवासियों में संघर्ष बढ़ेगा। आयरलैंड व स्काटलैंड से सम्बन्ध तनावग्रस्त होने के कारण यूनाइटेड किंगडम के स्वरुप पर खतरा मंडराता नजर आता है। ग्रहों के संकेत के आधार पर संवत का फल लिख दिया है। आगे सर्वशक्तिमान परमपिता परमेश्वर जो चाहेगा वही होगा।